सरबजीत सिंह के शहादत के पीछे की कहानी

Wrote this the night Sarabjit Singh passed away.( Note )

सरबजीत सिंह की हालही में मृत्यु हुई और उसी को लेकर ये ब्लॉग। कोशिश ये समझने के लिए की कुल मिलाके  वोह आदमी कैसे जीवन की आपा धापी की दौड़ में न केवल पीछे रह गया बल्कि कानून के नुमयिन्दों के सामने ऐसे एक बुने हुए जाल में फंसा, की उसमे से अपने आप को बचा कर निकलना उसके लिए मुश्किल साबित हुआ।

पाकिस्तानी कैदी खलील चिश्ती की रिहाई के बाद देश में ऐसा एक समय आया जब सरबजीत के घर वालों को लगा की जल्द ही उसके एक सदस्य की जान बक्श दी जाएगी, और वोह फिर सरहद पर कर देश लौट आयेगा। ऐसा हुआ नहीं, जब घर में उम्मीद की किरण जगी तो उसके बुझने में भी ज्यादा वख्त नहीं लगा।

जेल में हमला और उसके जिन्नाह हॉस्पिटल में ज़िन्दगी की लड़ाई लड़ने तक कई राजनेताओं ने, हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने और सरबजीत के घर वालों ने अपने बातों को स्पष्ट शब्दों में लोगों के सामने  रखा। हर एक को अपनी एक कहानी जो उनको लगा सही बोलना था, पर इस सब के चलते सरबजीत सिंह की मृत्यु हो गयी। जब पत्रकरों ने सरबजीत मसले पर  पैंथर पार्टी के चीफ, भीम सिंह से संपर्क साधा तोह उन्होंने साफ़ तौर पर ये कह दिया की ६ लोगों का सरबजीत पर हमला करना एक बेबुनियाद बात थी, और उनके लिए हज़म करना मुश्किल था। खैर इस पुरे प्रकरण को नज़र डालते हैं की कैसे इस आदमी के ससाथ कदम कदम पे धोका हुआ। ये है सरबजीत का सफ़र गिरफ्तारी से जिन्नाह हॉस्पिटल का सफ़र।
सरबजीत धोके से बनाया गया अजमल कसब से कम नहीं था। कई लोग सरबजीत के लिए आ खरे हुए और उन्होंने इस केस में अपनी सहानुभूति जताई। जहां पर कोट लखपत जेल में सरबजीत नी अपने जीवन के २ ३ साल बिता दिए, हर पल मौत का खौफ उसको साए की तरफ पीछा करता रहा। खबर के मुताबिक सरबजीत को ६ लोगों ने हमला किया कोट लखपत जेल में जहां पर उसको जिन्नाह हॉस्पिटल ले जाया गया और फिर उसकी वोहान मौत हो गयी। भीम सिंह हलाकि मानते हैं की  एक सोची समझी साज़िश के  तहत सरबजीत को मार दिया गया।
एक तरफ राजनेताओं के भाषण तो दूसरी ओर न्यूज़ रूम  की दमदार बेहेस का चर्चा और कोई नहीं, सरबजीत था। ये सब ऐसे वख्त पर जब डॉक्टर कुछ कहने से अपने आप को रोक रहे थे। कभी कहा जाता ब्रेन डेड, तोह कभी नॉन रिवर्सेबल कोमा, तो कभी एक जाने वाला इंसान। कुलमिलाकर एक बड़े ही असमंजस की स्थिति पैदा हो चली थी। इस बीच खबर २ माय को पता चला  की सरबजीत इस दुनिया में नहीं रहा। सरबजीत की बेहेन दलबीर कौर ने चीक चीख कर दिल्ली में धोका धरी, और गलती ढंकने का पाकिस्तान पर इलज़ाम  लगाया। यही नहीं  पाकिस्तानी सोशल एक्टिविस्ट अंसार बर्नी के फीते, जूते, चप्पल और कालर सब को बिकाऊ कहा। दलबीर का इलज़ाम था की उनसे पैओन के अविज में धोका मिला था।
भीम सिंह से जब बात चीत की पत्रकारों ने तो उन्होंने साफ़ कहा की विपक्ष की नियत ये लगती नहीं की वोह कोई बात का हल बात करके निकाले , चाहे वोह सरबजीत सिंह का ही मुद्दा क्यूँ न हो। उन्हों ने कहा की एक तरफ सर्कार चरमरायी हुई है, जब की विपक्ष भी अपने काम को करने में विफल है।
गौरतलब है की सरबजीत सिंह १ ९ ९ ० से पाकिस्तान के जिल में बंद थे । १ ९ ९ १ में उनका सिद्ध दोष हो गया। उसकी दिराफ्तारी १ ९ ९ ० के स्सेरिअल बम धमाकों के लिए किया गया था। ये धमाके फैसलाबाद और लाहौर  में हुए थे। इन धमाकों में १ ४ लोगों की मौत हो गयी थी। सरबजीत गलत पहचान के शिकार होने से जेल में गया। इस बात की पुष्टि न केवल सरबजीत ने करी बल्कि भीम सिंह ने भी इस बात का जीकर किया। सरबजीत को मंजीत सिंह मान कर गिरफ्तार किया गया था। भीम सिंह का मानना है की न तो फ ई र  और न ही बाकी दस्तावेज़ में  सरबजीत के बारे में कहा गया है। सिंह ने कहा की विदेश मंत्रालय ने भी इसमें चुस्ती नहीं दिखाई है।
१ ९ ९ १ में पाकिस्तान आर्मी एक्ट के तहत सरबजीत को मौत की सज़ा सुनाई गयी। इन २ ३ सालों में  न्याय के लिए उसकी लडाई जारी रही। उसने पांच दया याचिका दायर की परन्तु उसका लाभ उसे न मिला। २ ० १ २ में ऐसी खबरें उडी की वोह रिहा होगा, लेकिन मध्य रात्रि के बाद  एक खबर ने हल्ला मच दिया। पता चला की सरबजीत नहीं सुरजीत सिंह रिहा होगा।
सरबजीत सिंह हल जोतने गया था पर वोह लौटा नहीं। नौ महीने तक परिवार जन ने उसे ढूँढने की कोशिश तोह की पर वोह मिला नहीं। बाद में चिट्ठी मिली घर वालों को की वोह पाकिस्तान जेल में बंद है। सूत्रों की माने तोह वोह नशे की हालत में बॉर्डर क्रॉस कर गया था और पकड़ा गया। भीम सिंह मानते हैं की एक खंजर से उन पर वार हुआ था और उसके  सर पर गहरी चोट आई थी। मस्तिष्क पर वार के भी सबुत की बात उन्होंने की।
सरबजीत के परिवार वालों ने हर संभव कोशिश की थी सरबजीत को बचाने की । जिसने दिन उसने आखरी सांसें ली, उसके घर वाले सरकारी मेहेक्मे के दरवासे खटखटाने की तैय्यारी में थे। दलबीर खुर ने संवाददातों इ ये भी पहले कहा था की वोह ज्यादा सुकून में होती अगर भारतीय मूल के डॉक्टर उस पर नज़र बनाये हुए होते। इस सब के बीच  बड़ा सवाल ये है की शहीद कहलाने के क्या मायिने हैं?
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Categories Newsy Takes

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