११ साल का मोशे अतीत को भूल रब्बी बनने का खाब देखता है

 

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Baby Moshe : Source – Net

 

बेबी मोशे हंसा बोला, खिलखिलाया, उसने प्रधान मंत्री मोदी से आई लव यू भी कहा पर उसके और उसके परिवार के लिए शायद ही भूल पाना संभव हो वो मुंबई की काली रात जब उसके माता पिता को आतंकवादियों ने आठ साल पहले मौत के घाट उतारा था. तब वो महेज़ दो साल का था

प्रधान मंत्री के इज़्रेल के दौरे के दौरान मोशे अपने परिवार के साथ मोदी से मिला और उसने कुछ पल उनके साथ बिताए. सत्तर साल बाद पहली बार भारत के एक प्रधान मंत्री इज़्रेल में थे और मोशे के अपनों ने उनका बहुत गर्मजोशी के साथ स्वागत किया.

मोशे ने अपने बचपने का परिचय तब दिया जब उसने साफ हिन्दी में प्रधान मंत्री से कहा की हमारा आशीर्वाद हुमेशा आपके साथ है.

आज ग्यारह साल का मोशे एक नये सपने के साथ ज़िंदगी में आगे बढ़ चला है. संवाददाताओं से बात करते हुए अपने अतीत को पीछे छोड़ चला बालक एक दिन चाबाद हाउस का रब्बी बनना चाहता है.

मुंबई के सबसे डरावने मंज़र शायद मोशे को याद नही, पर आज भी उसे मालूम है की कुछ ऐसा मुंबई में हुआ जिसके चलते वो अपने माता पिता को गवा बैठा.

2008 के उस आतंकवादी हमले में वो बचा था तो उसका श्रेह उसके नॅनी सांद्रा समीऊल को जाता है. मुंबई के आतंकवादी हमलों में उसके माता पिता रीवकाह और रब्बी गेब्रीयल मारे गये.

खबरों की माने तो बेबी मोशे सिहर उठा था 2008 में पहली डिसेंबर की सुबह जब एक आयोजन रखा गया मोशे के माता पिता के लिए. घरवाले आज भी उस मंज़र को सोच कर टूट जाते हैं. घरवालों को और भी झटका इसलिए भी लगा क्यूंकी उसी साल बहुत भव्य आयोजन मोशे के जनमदिन पर होने वाला था.

पर कुद्रत को कुछ और ही मंज़ूर था. भरी महफ़िल में नन्हा मोशे जब अम्मा अम्मा अम्मा कह कर भटक रहा था तो लोगों ने दातों तले उंगलियाँ दबा ली थी.

एक अँग्रेज़ी दैनिक से बात करते हुए सांद्रा बताती हैं मैं आज भी मौका मिले तो चाबाद हाउस जाती हूँ. हालाकी वो लोग तो नही रहे, पर एक व्यस्त जगह होने के साथ साथ चाबाद हाउस में, होलतज़बेर्ग दंपति की तस्वीरों से ही मॅन भर जाता है.

वर्तमान समय में होलतज़बेर्ग के सपने को पूरा कर रहे हैं रब्बी इज़्रेल कोज़लोवस्की एवं उनकी पत्नी छाया

ये सांद्रा की ही देन थी की आज मोशे फिर से एक स्पेशल वीसा पर्मिट के बिना  पर भारत में कदम रखेगा. इज़्रेली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा है की जब वो भारत आएँगे मोशे उनके साथ होगा. 2008 के मुंबई हमले में आठ इज़्रेली मारे गये थे.

यून तो सांद्रा एक चाइल्ड रीहॅबिलिटेशन सेंटर में काम करती हैं पर हर रविवार वो अवश्य मोशे से मिलती हैं. मोशे अपने दादा और दादी रब्बी शिमॉन रोज़ेनबर्ग और यहूदित रोज़ेनबर्ग के साथ अफूला में रहता है.

गौरतलब है की चाबाद हाउस जो तब नरीमन हाउस के नाम से जाना जाता था पाँच में से एक जगह था जहाँ आतंकियों ने धाबा बोला. तकरीबन 166 लोग मारे गये थे इस हमले में जो अटॅक्स ऑफ 26/11 नमक एक फिल्म का विषय भी बना.

2008 मुंबई अटॅक्स चार दिन चलने वाला एक दस सदस्यों का संगठित हमला था माया नगरी पर, जिसमे मूल रूप से लश्कर तोइबा का हाथ था. 12 अलग शूटिंग और बम धमाके सामने आए थे.

 बड़े पैमाने पर इसने वैश्विक निंदा आकर्षित किया. 26 नवंबर को शुरू हुआ और 29 नवम्बर ख़तम हुआ. 166 लोग मारे गए और कम से कम 308 लोग घायल हो गए.

आठ हमले दक्षिण मुंबई में हुए जिसमे मुख्या रूप से छत्रपती शिवाजी टर्मिनस, ओबेरोई ट्राइडंट, ताज पॅलेस आंड टवर, लीयपोल्ड केफे, कमा हॉस्पिटल, नरीमन हाउस ज्यूयिश कम्यूनिटी सेंटर, मेट्रो  सिनेमा का ज़िकर होता है

26/11 से पहले मुंबई तब हिल गया था जब 13 संगठित बम धमाके 1993 में मुंबई को झेलना पड़ा. इन धमाकों में 257 लोग मारे और 700 घायल हो गये. 1993 के हमले को बाबरी विध्वंस के बदले के तौर पर देखा जाता है. घाटकोपर और ज़ावेरी बेज़ार प्रकरण के चलते भी मुंबई खबरों में बना रहा.

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